राजस्थान में बिताये इन जगहों पर समय !

राजेरजवाड़ों और राजसी वैभव के तमाम किस्से समेटे सांस्कृतिक और आधुनिकता का संगम बन चुका राजस्थान अपने अद्भुत वास्तुशिल्प, मधुर लोकसंगीत और रंगबिरंगे पहनावे के लिए मशहूर है. यही वजह है कि विदेशी पर्यटक यहां बरबस ही खिंचे चले आते हैं.

राजाओं की धरती राजस्थान देशी और विदेशी घुमक्कड़ों के लिए बेहतरीन पर्यटन स्थल माना जाता है. यह राज्य अपनी संस्कृति, रंगबिरंगे पहनावे और खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों के लिए जाना जाता है.
यहां की पुरानी हवेलियां जो कभी राजेमहाराजों और राजकुमारियों का निवास हुआ करती थीं, उन्हें पर्यटकों के लिए लग्जरी होटलों में तबदील कर दिया गया है. इन में रह कर पर्यटक कुछ समय के लिए खुद को इस राजसी राज्य का राजा महसूस करने लगते हैं.

जैसलमेर

राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में थार के रेगिस्तान के हृदयस्थल पर स्थित जैसलमेर देश के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है. अनुपम वास्तुशिल्प, मधुर लोकसंगीत, विपुल सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासत को अपने में समाए जैसलमेर पर्यटकों के स्वागत के लिए सदैव तत्पर रहता है. यह ?ालसाने वाली गरमी और जमा देने वाली ठंडी रेगिस्तानी जमीन के लिए जाना जाता है.

दर्शनीय स्थल

डेजर्ट कल्चर सैंटर व म्यूजियम : डैजर्ट कल्चर सैंटर व म्यूजियम राजस्थान की संपन्न संस्कृति को दर्शाता है. इस संग्रहालय में कई तरह के पारंपरिक  यंत्र, प्राचीन व मध्ययुग के सिक्के, खूबसूरत पारंपरिक टैक्सटाइल व बेशकीमती चीजों को संगृहीत किया गया है.

सलीम सिंह की हवेली : बेहतरीन शिल्पकला का नमूना दर्शाती यह हवेली जैसलमेर किले के निकट पहाडि़यों के पास स्थित है. इस की छत को मोर के डिजाइन में तैयार किया गया है जबकि हवेली के मुख्यद्वार पर एक  विशालकाय हाथी किसी द्वारपाल की भांति खड़ा है. हवेली के भीतर 38 बालकनी हैं. हवेली को सामने से देखने पर यह एक जहाज की तरह प्रतीत होती है, इसी कारण कई लोग इसे जहाजमहल भी कहते हैं.

पटवा हवेली : पटवा हवेली जैसलमेर में स्थित हवेलियों में अपना अलग ही स्थान रखती है. पत्थर से बनी इस हवेली की किनारियों को सुनहरे रंग से रंगा गया है. इस हवेली को पटवा भाइयों द्वारा 1800 व 1860 के मध्य बनवाया गया था, जो गहनों के व्यापारी थे. वर्तमान में इसे पटवा स्टाइल के फर्नीचर व साजसजावट से सजाया गया है जो पर्यटकों को पटवाओं के रहनसहन की ?ालक दिखाता है.

कैमल सफारी : जैसलमेर का यह वह स्थान है जहां पर देशीविदेशी पर्यटकों को राजस्थान की शाही सवारी यानी ऊंट पर सवारी करने का रोमांचकारी अनुभव होता है. ऊंट पर्यटकों को अपनी पीठ पर बिठा कर पास ही स्थित छोटेछोटे गांवों तक सैर के लिए ले जाता है, जहां पर्यटकों को राजस्थानी जीवनशैली के दर्शन होते हैं. वहीं ऊंट पर बैठ कर आप हवेलियों, मंदिरों व अन्य स्थानों तक भी जा सकते हैं, रास्ते में आप को लोकनृत्य व लोकसंगीत की ?ालकियां देखने को मिलेंगी.

उदयपुर

अरावली पहाड़ी के निकट स्थित राजस्थान के सब से खूबसूरत शहर उदयपुर को ?ालों का शहर भी कहा जाता है. यह अपनी प्रकृति और मानवीय रचनाओं से समृद्घ अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है. यहां की हवेलियों, महलों, ?ालों और हरियाली को देख कर सैलानी उमंग से भर जाते हैं. मनमोहक और हरेभरे बगीचे, ?ालें, नहरें, दूध की तरह सफेद संगमरमर के महल इस शहर को रोमांटिक बनाते हैं.

दर्शनीय स्थल

सिटी पैलेस : इस महल की स्थापना 16वीं सदी की शुरुआत में की गई थी. इसे बनाने में 22 राजाओं का योगदान रहा. शीशे और कांच के कार्य से निर्मित यह भव्य महल यूरोपीय व चीनी वास्तुकला का उम्दा नमूना पेश करता है. किले के भीतर गलियारों, मंडपों, प्रांगणों व बगीचों के समूह हैं. इस में कई बालकनियां और टावर भी हैं. पैलेस के मुख्य हिस्से को संग्रहालय का रूप दिया गया है जिस में पुरानी वस्तुओं को संरक्षित रखा गया है.

पिछौला ?ाल : इस ?ाल के बीच में जलमहल, जग मंदिर, जगनिवास क ा निर्माण हुआ है. इस खूबसूरत ?ाल के सफेद पानी में पर्यटक नौका विहार का आनंद लेते हैं.

सहेलियों की बाड़ी : यह उदयपुर की रानियों व राजकुमारियों के आराम करने के लिए बनवाई गई थीं. इस विश्राम स्थल में कई सुंदर फौआरे लगे हुए हैं. यह चारों ओर से हरियाली से घिरी है.

फतेहसागर : यह ? झील एक नहर द्वारा पिछौला ? झील से जुड़ी हुई है. यह 3 तरफ से पहाडि़यों से घिरी है इस के बीच में नेहरू पार्क है. इस में एक खूबसूरत रेस्तरां बनाया गया है जहां पहुंचने के लिए ?ाल के बीच में एक पुल का निर्माण किया गया है. इस रेस्तरां में आराम से बैठ कर पर्यटक विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लेते हैं.

भारतीय लोककला मंडल : जिन लोगों को राजस्थान की पारंपरिक व ऐतिहासिक वस्तुएं देखने में रुचि है उन के लिए यह स्थान सब से उपयुक्त है. यहां राजस्थानी पहनावे, गहने, वाद्ययंत्र, कठपुतलियां, मुखौटे और उस समय की सुंदर चित्रकारी का दुर्लभ संग्रह है. विशेष रूप से बच्चे यहां हर रोज दिखाए जाने वाले कठपुतली नृत्य का जम कर आनंद लेते हैं.

माउंट आबू

माउंट आबू ‘डेजर्ट स्टेट’ कहे जाने वाले राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन है जो गुजरात वालों के लिए वहां की हिल स्टेशन की कमी को भी पूरा करता है. दक्षिणी राजस्थान के सिरोही जिले में गुजरात की सीमा से सटा यह हिल स्टेशन 4 हजार फुट की ऊंचाई पर बसा हुआ है. इस की सुंदरता कश्मीर से कम नहीं आंकी जाती.

दर्शनीय स्थल

नक्की झील : राजस्थान के माउंट आबू में 3,937 फुट की ऊंचाई पर स्थित नक्की झील लगभग ढाई किलोमीटर के दायरे में फैली हुई कृत्रिम झील है. झील के आसपास हरीभरी वादियां, खजूर के वृक्षों की कतारें, पहाडि़यों से घिरी झील और झील के बीच आईलैंड किसी को भी मंत्रमुग्ध करने के लिए काफी है. झील में बोटिंग करने का मजा भी लिया जा सकता है, जिस में पैडल बोट, शिकारा व फैमिली बोट का मजा उठा सकते हैं.

सनसैट पौइंट : शाम के समय सनसैट पौइंट से सूरज के ढलने का नजारा देखने के लिए सैकड़ों सैलानी यहां उमड़ पड़ते हैं. पर्यटक इस नजारे को अपने कैमरों में कैद कर के ले जाते हैं. इस पौइंट तक पैदल चल कर तो जाया ही जा सकता है. यदि आप पैदल नहीं चलना चाहते तो यहां पहुंचने के लिए ऊंट अथवा घोड़े की सवारी कर के पहुंच सकते हैं.

हनीमून पौइंट :  सनसैट पौइंट से 2 किलोमीटर दूर नवविवाहित जोड़ों के लिए हनीमून पौइंट है. यह ‘आंद्रा पौइंट’ के नाम से भी जाना जाता है. शाम के समय यहां नवविवाहित जोड़े होटलों के कमरों से निकल कर प्रकृति का आनंद उठाते हैं.

टौड रौक : यह मेढक के आकार की बनी एक चट्टान है जो नक्की झील से कुछ ही दूरी पर स्थित है. यह चट्टान सैलानियों, विशेष रूप से बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करती है. चट्टान इस तरह अपने स्थान पर टिकी है मानो यह अभी झील में कूद पड़ेगी, इसलिए यह पर्यटकों के लिए कुतूहल का केंद्र है.

म्यूजियम और आर्ट गैलरी : राजभवन परिसर में 1962 में गवर्नमैंट म्यूजियम स्थापित किया गया है ताकि इस क्षेत्र की पुरातात्विक संपदा को संरक्षित रखा जा सके.

गुरुशिखर : गुरुशिखर समुद्रतल से करीब 1,722 मीटर ऊंचा है. यह अरावली पर्वत की सब से ऊंची चोटी है. इस शिखर से नीचे और आसपास का नजारा देखना सैलानियों को अलग ही अनुभव देता है.

वन्यजीव अभयारण्य : राज्य सरकार द्वारा 228 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को 1960 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था. पशुपक्षियों को नजदीक से देखने की चाह रखने वाले लोगों के लिए यह जगह उत्तम है. यहां वानस्पतिक विविधता, वन्यजीव व स्थानीय प्रवासी पक्षी आदि देखे जा सकते हैं. पक्षियों की लगभग 250 और पौधों की 110 से अधिक प्रजातियां देखी जा सकती हैं. साथ ही तेंदुए, वाइल्ड बोर, सांभर, चिंकारा और लंगूर आप को उछलकूद करते दिख जाएंगे.

जयपुर

‘पिंक सिटी’ के नाम से मशहूर जयपुर राजस्थान की राजधानी है. जयपुर अपनी वास्तुकला के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. यहां कला, संस्कृति और सभ्यता का अनोखा संगम देखने मिलता है.

दर्शनीय स्थल

हवामहल : यह शिल्पकला का उम्दा नमूना माना जाता है. यह जयपुर का सब से अनोखा स्मारक है.  इस में 152 खिड़कियां व जालीदार छज्जे हैं. अपनी कलात्मकता के लिए विख्यात हवामहल का निर्माण 18वीं सदी में राजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा करवाया गया था. शहर के केंद्र में बना यह पांचमंजिला महल लाल और गुलाबी रंग, सैंड स्टोन से मिलजुल कर बना है. यहां से शहर का आकर्षक नजारा देखा जा सकता है.

सिटी पैलेस : शहर में स्थित सिटी पैलेस मुगल और राजस्थानी स्थापत्य कला का एक बेहतरीन नमूना है. पुराने शहर के दिल में स्थित सिटी पैलेस वृहद क्षेत्र में फैला हुआ  है. सिटी पैलेस के एक हिस्से में अब भी जयपुर का शाही परिवार रहता है. कई इमारतें, सुंदर बगीचे और गलियारे इस महल का हिस्सा हैं.

जलमहल : यह सवाई प्रताप सिंह द्वारा 1799 में बनवाया गया था. यह महल मान सागर झील के  बीचोंबीच स्थित है.

अपने सपनो का घर ऐसा होना चाहिए

हर परिवार का एक सपना होता है कि उस के सपनों का आशियाना सब से सुंदर बने. इस काम में भवन निर्माण से जुड़े ठेकेदारों व आर्किटैक्टों की अहम भूमिका होती है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इन का चयन कैसे करें.

आम लोगों की यह धारणा बनी हुई है कि यदि जल्दी काम कराना है या समय बचाना है तो संबंधित काम ठेके पर दे दो. भवन निर्माण के क्षेत्र में ठेकेदारी का चलन सब से अधिक है. यहां का ज्यादातर काम ठेकेदारी पर ही होता है. अब तो भवन निर्माण में काम करने वाले कारीगर भी ठेके पर काम करना अधिक मुनासिब समझते हैं.

हम सभी अपने घर को सुंदर देखना पसंद करते हैं और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि प्रोफेशनल डिजाइनर्स के पास भी घर सजाने के कोई खास नियम नहीं होते। अगर बात घर की खूबसूरती बढ़ाने की है तो हम सभी में प्राकृतिक तौर पर ही इस काम को अंजाम देने के गुण होते हैं।

पहले लोग किसी भी तरह का प्रयोग अपने घर के इंटीरियर को लेकर करने में हिचकिचाते थे, लेकिन अब ऐसा बिलकुल भी नहीं है। यही वजह है कि अब लोग घर को सजाते समय हर छोटी-बड़ी चीज को लेकर प्रयोग करने में नहीं डरते। बस आपको करना यह है कि अपने मन में घर सजाने को लेकर आने वाले विचारों पर और गहराई से सोचना है। यकीन जानिए आप आखिरकार अपने घर के उस रूप को देखने में कामयाब हो जाएंगे, जो आप पाना चाहते हैं और इस सपनों के महल को हकीकत में लाना अब बेहद आसान है।

घर सजाने या उसे नया लुक देने की प्रक्रिया में कुछ बदलाव हमेशा और हर जगह लागू होते हैं जिनमें घर की दीवारों को पेंट करवाना, फर्नीचर की जगह बदलना या नया फर्नीचर लाना, पेंटिग्स और फ्लावर पॉट रखना और रंगीन लाइट का चुनाव शामिल है। घर को अपने अनुसार से लुक देना बेहद आसान है, लेकिन ज्यादातर लोग इन्हें अपनाना जरूरी नहीं समझते या उन्हें इनकी जानकारी नहीं होती।

आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही खास टिप्स जिनसे आपके घर की खूबसूरती में चार चांद लगाना होगा बेहद आसान और आपके मेहमान आपके टेस्ट की तारीफ करते थकेंगे नहीं।

कैसे करें अनुबंध

भवन निर्माण ठेकेदार से 2 तरह से अनुबंध किया जा सकता है. पहले में यह होता है कि भवन मालिक अपने भवन के निर्माण का संपूर्ण ठेका ठेकेदार को दे देता है. इस में भवन मालिक को सिर्फ पैसा देना पड़ता है. भवन निर्माण सामग्री एवं मजदूर व कारीगरों की व्यवस्था ठेकेदार अपनी तरफ से करता है. दूसरे प्रकार में भवन मालिक निर्माण से संबंधित समस्त सामग्री उपलब्ध करा देता है. इस में ठेकेदार के कारीगर व मजदूर होते हैं.

एक बात यहां जरूर ध्यान में रखनी चाहिए कि ठेका किसी भी प्रकार का हो, ठेकेदार को ठेका देते समय सभी बातें व शर्तें लिखित में होनी चाहिए, ताकि बाद में ठेकेदार अपने अनुबंध से मुकरे नहीं. अकसर होता यह है कि ठेकेदार अपने क्षेत्र के माहिर होते हैं, ऐसे में वे भोलेभाले भवन मालिकों को चूना लगाने से नहीं चूकते. इसलिए ठेकेदार से जो भी अनुबंध करें, लिखित में, स्टांपपेपर पर करें.

आर्किटैक्ट की भूमिका

भवन निर्माण के संबंध में आर्किटैक्ट की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता. आर्किटैक्ट की उपयोगिता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, क्योंकि एक आर्किटैक्ट ही भवन मालिक के बजट के अनुसार बढि़या से बढि़या योजना बना कर हवादार व सुंदर भवन का डिजाइन तैयार करता है. एक इंजीनियर भवन में विशालता एवं मजबूती ला सकता हैं, उस में खूबसूरती सिर्फ एक आर्किटैक्ट ही पैदा कर सकता है. किसी भी अनुभवी आर्किटैक्ट के दिशानिर्देशन में कम लागत में बेहतर मकान, सर्वश्रेष्ठ निर्माण क्वालिटी व आवश्यक समयावधि में बनवाया जा सकता है.

सर्वप्रथम भवन मालिक को यह तय कर लेना चाहिए कि उस की आवश्यकता क्या है व बजट कितना है. इस के बाद एक अनुभवी आर्किटैक्ट को अपनी आवश्यकता व बजट बता कर उस के द्वारा तैयार किए गए विभिन्न मौडलों में से अपनी पसंद का कोई एक मौडल चुन कर  बता देना होता है.

इस के बाद भवन निर्माण का कार्य

3-4 चरणों में संपादित होता है. पहले चरण में आर्किटैक्ट की प्लानिंग-डिजाइनिंग होती है, जिस में एक नक्शा नगर निगम, नगर पालिका, नगर एवं विकास प्राधिकरण द्वारा पास होना होता है. इसी नक्शे के आधार पर वर्क्स ड्राइंग्स जैसे फाउंडेशन ड्राइंग,  छत लैवल ड्राइंग, लाइट फिटिंग की ड्राइंग, सेनेटरी एवं वाटर सप्लाई ड्राइंग्स और आंतरिक साजसज्जा आदि की ड्राइंग बनवाई जाती हैं.

दूसरे चरण में ठेकेदार द्वारा आर्किटैक्ट की देखरेख में भवन निर्माण शुरू होता है. इस के लिए समयसमय पर आर्किटैक्ट हर चरण पर ठेकेदार को दिशानिर्देश देता है व सुपरविजन करता है. इस तरह भवन निर्माण में कोई गड़बड़ी नहीं हो पाती व भवन निर्धारित समयसीमा व लागत के अंदर बन कर तैयार हो जाता है.

भवन मालिक  और ठेकेदार के आपसी अनुबंध में किए गए कार्य के अनुसार भुगतान किया जाता है. ठेकेदार को भुगतान करने से पहले अपने आर्किटैक्ट से रायमशवरा कर लेने में सहूलियत रहती है. यदि आर्किटैक्ट को लगता है कि काम उस की मरजी का नहीं हुआ है तो वह ठेकेदार को भुगतान करने से मना भी कर सकता है.

टैंशनफ्री लाइफ जीने के बेहतरीन तरीके !

आजकल की दिनरात की दौड़धूप, औफिस जानेआने की चिंता, बच्चों की देखभाल, उन की पढ़ाई की चिंता, परिवार के खर्चे आदि कुछ ऐसे कारण हैं, जो पुरुषों से अधिक औरतों को परेशान करते हैं.

 

रीना और नरेश की शादी को 3 साल हो गए हैं. पतिपत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं. औफिस में काम के सिलसिले में उन्हें शहर के बाहर भी जाना पड़ता है. अभी तक सब ठीक चलता आ रहा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से रीना को थकान, बेचैनी और नींद न आने की शिकायत रहने लगी है.

डाक्टर को दिखाने पर पता चला कि रीना तनाव में जी रही है. नौकरी के कारण पतिपत्नी को काफी समय तक अलगअलग रहना पड़ता. जब तक उस का पति साथ रहता, तब तक सब सही रहता, लेकिन जब वह अकेली होती तो उस के लिए घर के कामों और नौकरी के बीच तालमेल बैठाना मुश्किल हो जाता. वैसे भी रीना चाह रही थी कि अब वह अपना घर संभाले, परिवार बढ़ाए. मगर उस का पति कुछ समय और इंतजार करना चाह रहा था. बस इसी वजह से रीना तनाव में रहने लगी थी.

तनाव के कारण

– आजकल की दिनरात की दौड़धूप, औफिस जानेआने की चिंता, बच्चों की देखभाल, उन की पढ़ाई की चिंता, परिवार के खर्चे आदि कुछ ऐसे कारण हैं, जो पुरुषों से अधिक औरतों को परेशान करते हैं. इन के अलावा हारमोन का बैलेंस गड़बड़ाना (माहवारी से पहले और मेनोपौज के दौरान), मौसम में बदलाव आदि भी किसी महिला के जीवन में अवसाद का कारण बनते हैं.

– गर्भधारण के समय से ही महिलाओं के दिमाग में बेटा होगा या बेटी की चिंता घर करने लगती है. परिवार के बड़ेबुजुर्ग बारबार बेटाबेटा कह कर उन के तनाव को और बढ़ा देते हैं, जबकि यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि औलाद के बेटा या बेटी होने के लिए किसी भी महिला को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. फिर भी हमारे समाज में अनपढ़ ही नहीं पढ़ेलिखे लोग भी बेटी होने पर दोषी मां को ही ठहराते हैं.

– सच कहा जाए तो तनाव की शुरुआत बेटी के जन्म से ही हो जाती है और उस की उम्र के साथसाथ बढ़ती जाती है.

– अच्छे पढ़ेलिखे होने के बावजूद मनपसंद नौकरी न मिलना, नौकरी मिल जाए तो समय पर तरक्की न मिलना, घरबाहर के कामों के बीच तालमेल न बैठा पाने के कारण पढ़ीलिखी युवतियां भी तनाव से घिरती चली जाती हैं.

– मनोवैज्ञानिकों के शोधों से पता चलता है कि किसी कंपीटिशन में नाकामयाब होने पर भी महिलाएं जल्दी निराशा के कारण तनाव से घिर जाती हैं.

– चिंता, परेशानी और दबाव से भी तनाव पैदा होता है. यह कोई रोग नहीं है. हालात से तालमेल न बैठा पाना, परिवार और दोस्तों से जरूरत पर मदद न मिल पाना, मेनोपौज में हारमोन बैलेंस गड़बड़ाना आदि किसी भी महिला के जीवन में तनाव का कारण बन सकते हैं. शराब या अन्य नशा, अपनी किसी बीमारी का सही तरीके से इलाज न कराना आदि भी तनाव के लिए जिम्मेदार हैं. कई बार महिलाओं में रिटायरमैंट के बाद भी ये हालात पैदा हो जाते हैं.

लक्षण

– याददाश्त कमजोर होना, उलटी की इच्छा होना, सांस लेने में परेशानी, भूख कम लगना, शारीरिक क्षमता का कम होना, काम में मन न लगना, सिरदर्द, ज्यादा पसीना आना, मुंह सूखना, बारबार पेशाब की इच्छा. इन लक्षणों की चपेट में आने वाले खुद को परिवार व समाज पर बोझ समझते हैं. वे कोशिश करने के बावजूद समस्या के हल तक नहीं पहुंच पाते और अपना विश्वास खो बैठते हैं और फिर धीरेधीरे निराशा की ओर बढ़ने लगते हैं.

कैसे करें तनाव दूर

– जीवन में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब निराशा के साथ संघर्ष करना पड़ता है. जीवन की महानता इसी में है कि कठिनाइयों से लोहा लेते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए उत्साह से आगे बढ़ते चलें. काम इस तरह करें कि थकने के पहले ही आराम मिल जाए. उदास व थका रहना या दिखना व्यक्ति में तनाव या अपराध का भाव पैदा करता है.

– अच्छी नींद न आने से बहुत नुकसान होता है. गहरी नींद के लिए संगीत सुनना सहायक होता है. सोने से पहले पढ़ना भी अच्छी आदत है. इस से भी अच्छी नींद आती है.

– ज्यादा नाउम्मीदी हीनभावना को जन्म देती है. अपनी सोच पौजिटिव रखें. जो आप के पास नहीं है या जो आप के वश में नहीं है उस के लिए चिंता मत कीजिए. जो आप के पास है उसी में खुश रहें.

– खानपान पर भी ध्यान देना जरूरी है. फलों व सब्जियों का सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करता है. मेनोपौज की स्टेज में महिला के शरीर में कैल्सियम की मात्रा कम हो जाती है, जिस से औस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के रोग होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए कैल्सियम और विटामिन डी अपनी डाइट में शामिल करना न भूलें. रोज व्यायाम करने की आदत बनाएं.