सिर्फ 30 सेकेंड्स में करे कोई भी मोबाइल हेक !

आप अपने स्‍मार्टफोन पर हर तरह की ट्रांजेक्‍शन करके अपना खूब समय बचाते हैं, लेकिन यही स्‍मार्टफोन आपकी जेब में सेंध लगा सकता है.

अब लैपटॉप और डेस्कटॉप का जमाना गया लोग अपना हर काम स्मार्टफोन की मदद से ही करते हैं. प्रोफेशनल लाइफ से लेकर पर्सनल लाइफ तक सबकुछ स्मार्टफोन से जुड़ गया है. चाहें बात बैंक पासवर्ड से जुड़ी हुई हो या किसी पार्टी की फोटोज से आपका स्मार्टफोन अगर किसी गलत हाथ में पड़ जाए तो काफी मुश्किल हो सकती है. अगर हम आपसे कहें की स्मार्टफोन से जुड़ी कुछ जानकारियां मात्र 30 सेकेंड में कोई भी आसानी से चुरा सकता है. जी हां, आज हम आपको बताने जा रहे किस तरह आपके स्मार्टफोन का उपयोग कर हैकर आपको चुना लगा सकते है

टिल्ट सेंसर

अगर आप ऑफिस कर्मचारी हैं तो स्मार्टफोन को अपनी डेस्क पर रखना आपकी आदत बन चुकी होगी. स्मार्टफोन में एक डिवाइस लगा होता है जिसका नाम टिल्ट सेंसर है. अगर किसी हैकर ने आपके स्मार्टफोन को शिकार बना लिया है तो इस डिवाइज की मदद से आसानी से कम्प्यूटर पर हो रही हर गतिविधी का पता लगाया जा सकता है. इसके जरिए सेव किए हुए पासवर्ड, बैंक अकाउंट, सिस्टम पर क्या टाइप हो रहा है, यहां तक की नॉन वेज चैट को भी आसानी से कॉपी किया जा सकता है.

स्मार्टफोन सेंसर

स्मार्टफोन के सेंसर की मदद से आसानी से क्रेडिट कार्ड के सारे राज खोले जा सकते हैं. इसके लिए बस स्मार्टफोन को क्रेडिट कार्ड के करीब लाने की जरूरत है. इसके लिए स्मार्टफोन से निकलने वाली वेव्स का सहारा लिया जाता है. बस किसी अनुभवी हैकर के सामने अपना क्रेडिट कार्ड रखिए और काम तमाम. इसके अलावा भी कई ऐसे तरीके हैं जो स्मार्टफोन का इस्तेमाल जरूरी जानकारी चुराने के लिए प्रयोग किए जाते हैं. फ्री चार्जिंग सर्विस स्टेशन और वायरलेस चार्जिंग से लेकर किसी अन्य सॉफ्टवेयर की मदद से स्मार्टफोन हैक किया जा सकता है.

हैकिंग सॉफ्टवेयर

इस तकनीक के माध्यम से हैकर उस फोन की तलाश में रहते हैं जिसमें ब्लूटूथ या वाई फाई का उपयोग हो रहा हो. इसके लिए हैकर किसी भीड़ वाली जगह में अपने लैपटॉप पर हैकिंग सॉफ्टवेयर को एक्टिवेट करता है. यह सॉफ्टवेयर एक एंटीने के जरिए उपयोग में आ रहे नजदीकी ब्लूटूथ के सिग्नल को पकड़ लेता है. फिर अपने लैपटॉप के जरिए वह आपके मोबाइल पर उपलब्ध सारी जानकारी हासिल कर उसका उपयोग कर सकता है.

क्या आप जानते हैं गूगल पर कुछ सवाल और जानकारियां सर्च करने से आप सुरक्षा और जांच एजेंसियों के रडार पर आ सकते हैं. आइए आपको उन चीजों के बारे में बताते हैं जिन्हें गूगल पर सर्च न करने में ही भलाई है.

आज सभी के हाथ में स्मार्टफोन है और स्मार्टफोन से हम गूगल सर्च का उपयोग भी करते हैं. अब तो फोन में गूगल असिस्टेंट का सपोर्ट मिल रहा है जिसकी मदद से हम अपनी आवाज में बोलकर भी सर्च कर सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसे सवाल और जानकारियां भी हैं जिन्हें गूगल पर सर्च करने से आप सुरक्षा और जांच एजेंसियों के रडार पर भी आ सकते हैं. आइए आपको उन चीजों के बारे में बताते हैं जिन्हें गूगल पर सर्च न करने में ही भलाई है.

गूगल पर आप मजाक में या टाइम पास करने के लिए भी बम बनाने का तरीका सर्च करते हैं तो आपको पुलिस घर से उठा ले जा सकती है. दरअसल क्राइम और साइबर की नजर उन यूट्यूब चैनल और वेबसाइट्स पर होती है जिन पर बम बनाने के तरीके सिखाए जाते हैं. ऐसे में आप इन वेबसाइट पर जाते हैं पुलिस की नजर में आ सकते हैं और आपके आईपी एड्रेस के आधार पर पुलिस आपके पास पहुंच सकती है.

अगर आप गूगल पर किसी वजह से या जानबूझकर चाइल्ड पौर्न के बारे में सर्च कर रहे हैं तो आज ही बंद कर दीजिए, क्योंकि ऐसा करना आपको भारी पड़ सकता है. बता दें कि भारत में चाइल्ड पॉर्न देखना, बढ़ावा देना और जानकारी इकट्ठा करना गैरकानूनी है.

ऐसी कोई जानकारी गूगल पर सर्च ना करें जिसकी आपकी पहचान जाहिर हो रही हो. जैसे- लोकेशन, औफिस और घर के बारे में सर्च ना करें. उदाहरण के तौर पर आप गांव का लोकेशन तो सर्च कर सकते हैं लेकिन डायरेक्ट एड्रेस डालकर गूगल में सर्च करना खतरे से खाली नहीं है.

इस नए फीचर के आने के बाद आप स्वाइप राइट जेस्चर की मदद से किसी भी मैसेज का तेजी से रिप्लाई कर पाएंगे. इसका मतलब यह हुआ कि अब आपको रिप्लाई बटन के लिए मैसेज को दबाने और होल्ड करने की जरूरत नहीं होगी.

2018 में व्हाट्सऐप ने तेजी से नए फीचर को लौन्च किया और उनकी टेस्टिंग की है. कंपनी इन दिनों व्हाट्सऐप एंड्रायड ऐप के लिए स्वाइप टू रिप्लाई फीचर देने के लिए काम कर रही है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वाइप टू रिप्लाई फीचर पहले से iOS यानी आईफोन ऐप के लिए मौजूद है. यूजर्स की सहूलियत के लिए व्हाट्सऐप स्वाइप टू रिप्लाई फीचर को लाया जा रहा है. इस नए फीचर के आने के बाद आप स्वाइप राइट जेस्चर की मदद से किसी भी मैसेज का तेजी से रिप्लाई कर पाएंगे. इसका मतलब यह हुआ कि अब आपको रिप्लाई बटन के लिए मैसेज को दबाने और होल्ड करने की जरूरत नहीं होगी. इसके अलावा कंपनी एक और नए फीचर पर भी काम कर रही है. यह नया फीचर डार्क मोड के नाम से जाना जाएगा.

WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी व्हाट्सऐप एंड्रायड ऐप के लिए स्वाइप टू रिप्लाई फीचर देने के लिए काम कर रही है. व्हाट्सऐप ने Google Play Beta Programme में नए अपडेट को सबमिट किया है. कंपनी के बीटा वर्जन 2.18.282 में स्वाइप टू रिप्लाई फीचर उपलब्ध है. रिपोर्ट में दावा किया गया कि तकनीकी वजहों के कारण यह फीचर अभी उपलब्ध नहीं है. कई सुधार करने के बाद ही एंड्रायड यूजर के लिए फीचर को जारी किया जाएगा. कहा जा रहा है कि आने वाले कुछ अपडेट्स में इस फीचर को रोल आउट किया जा सकता है. स्वाइप टू रिप्लाई फीचर आने के बाद आप दाहिने तरफ उस मैसेज को स्वाइप करें जिसको आपको रिप्लाई करना चाहते हैं. ऐसा करने के बाद व्हाट्सऐप अपने आप रिप्लाई बौक्स में उस मैसेज को लोड कर देगा.

कंपनी ऐप में डार्क मोड फीचर देने पर भी काम कर रही है. WABetaInfo द्वारा किए ट्वीट के मुताबिक, iOS और एंड्रायड ऐप में डार्क मोड फीचर देने के लिए व्हाट्सऐप ने काम शुरू कर दिया है. रिपोर्ट में फिलहाल इस बात का जिक्र नहीं है कि इस फीचर को आखिर कब तक जारी कर दिया जाएगा. नए फीचर के आने के बाद व्हाट्सऐप को रात में या फिर कम रोशनी में इस्तेमाल करने पर यूजर्स की आंखों को होने वाला तनाव कम हो जाएगा. केवल इतना ही नहीं, ओलेड डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन की बैटरी को बचाने में भी यह फीचर मददगार साबित होगा.

जब नींद न आए और बेचैनी सताए, तो आजमाएं ये उपाय

आप सोना चाहते हैं, लेकिन दिमाग कहीं भटक रहा है. नींद न आने पर मजबूर हो कर आप अपने दोस्त से चैटिंग करने लगते. अगर आप भी दिन भर की थकान के बाद बिस्तर पर जाते हैं पर नींद आंखों से कोसों दूर रहती है, तो यह जानकारी आप के लिए ही है.

आप सोना चाहते हैं, लेकिन दिमाग कहीं भटक रहा है. नींद न आने पर मजबूर हो कर आप अपने दोस्त से चैटिंग करने लगते हैं या बेमतलब फेसबुक अथवा यू ट्यूब पर कोई वीडियो देखने लगते हैं. सोने की कोशिश करने की जगह आप सोशल मीडिया से चिपक जाते हैं. नींद न आने की यह बीमारी अनिद्रा कहलाती है. जीवनशैली से संबंधित रोग सभी को प्रभावित करते हैं और इन में हाइपरटैंशन, तनाव, डिप्रैशन, अनिद्रा आदि शामिल हैं.

नींद न आने की समस्या

दरअसल, जरूरत से ज्यादा काम करने से दिमाग व शरीर के थकने, जल्दबाजी में खाना खाने और जंग फूड पर ज्यादा निर्भरता से लाइफस्टाइल में इस तरह की गड़बडि़यां पैदा होती हैं. अनिद्रा कई कारणों से मनुष्य पर प्रभाव डाल सकती है. यह व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक सेहत को खराब कर सकती है.

एक अध्ययन के अनुसार अमेरिका में 30 से 40 फीसदी वयस्क नींद न आने की बीमारी से पीडि़त हैं, जबकि 10 से 15 फीसदी वयस्कों को यह समस्या अपने परिवार से विरासत में मिलती है. भारत में 1 करोड़ से ज्यादा लोग नींद न आने की समस्या से पीडि़त हैं.

इस का सब से प्रमुख कारण यह है कि हर व्यक्ति ज्यादा पैसा कमाना चाहता है, इसलिए वह देर रात तक औफिस में रुकता है. उसे पार्टी भी करनी है. इसलिए वह औफिस के बाद पार्टी भी अटैंड करता है. आज उस की जिंदगी में हर चीज परफैक्ट है, पर एक चीज लापता है और वह है नींद.

जीवन पर गहरा प्रभाव

बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि हमारे दिमाग में एक सोने की और एक जागने की साइकिल होती है. अगर स्लीप साइकिल वर्किंग मोड में होती है तो वैकअप साइकिल औफ रहती है, क्योंकि यह तब प्रभावी होती है जब स्लीप साइकिल काम करना बंद कर देती है. इसलिए जब कोई अनिद्रा से ग्रस्त होता है तो उस के बायोलौजिकल सिस्टम में दोनों साइकिल एक ही साइड पर काम करती हैं. सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली नींद न आने की यह आदत जीवन पर काफी गहरा प्रभाव डालती है. इस से किसी भी व्यक्ति को सोने में काफी परेशानी होती है, जिस से उस की ऐनर्जी में कमी आती है, उस का मन किसी एक जगह नहीं लगता. मूड लगातार बदलता रहता है. इस के साथ ही उस की परफौर्मैंस पर भी प्रभाव पड़ता है.

कितनी जरूरी है नींद

नींद न आने की समस्या से पीडि़त अधिकांश लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कई परेशानियों का सामना करते हैं. नींद न आने से लोग तनावग्रस्त रहते हैं, मनोवैज्ञानिक परेशानी महसूस करने लगते हैं. उन्हें बहुत जल्दी गुस्सा आता है. उन का दिमाग ठीक ढंग से काम नहीं करता. कुछ लोग देर तक औफिस में ठहरते हैं. वह एक ही चेयर पर बैठेबैठे देर तक काम करते हैं, जिस से उन की रीढ़ की हड्डी में दर्द होने लगता है और वे कमर दर्द के भी शिकार हो जाते हैं.

अगर नींद न आने की समस्या 3-4 हफ्तों से ज्यादा समय तक रहती है, तो उस व्यक्ति को डाक्टर से संपर्क करना चाहिए. कुछ लोग नींद न आने का इलाज कराने से भी डरते हैं, क्योंकि वे सोचते हैं कि इस बीमारी की दवा लेने के साइड इफैक्ट झेलने पड़ेंगे, लेकिन इस बीमारी को कुदरती इलाज से भी ठीक किया जा सकता है. हम सभी के लिए 8 घंटे की भरपूर नींद चाहिए. नींद हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी है.

क्या करें

यदि आप को नींद न आने की बीमारी हो, तो आप घर में इस उपाय को आजमा सकते हैं- सोने से पहले गरम पानी से स्नान करें. यह एक ऐक्सरसाइज की तरह होगा. गरम पानी से नहाने के बाद बैड पर जाते ही आप को नींद आ जाएगी.

दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद आप को अपने मांसपेशियों को आराम देने और अच्छी नींद लेने के लिए अपने शरीर को कूलडाउन करने की जरूरत होती है. इस के लिए आप किसी टब या बालटी में कुनकुने पानी में अपने पैरों को डुबो कर रख सकते हैं.

अपने शरीर की मांसपेशियों एवं ऊतकों को आराम देने के लिए आप

1 चम्मच एप्सौम साल्ट या डैड सी साल्ट को पानी में डाल सकते हैं. फुट बाथ आप की त्वचा को बैक्टीरिया से बचाता है और दिन भर की थकान से हुए पैरों के दर्द को भी कम करता है. उस गरम पानी में आप कुछ आवश्यक तेल भी डाल सकते हैं, जिस से रिलैक्स होने में मदद मिलती है. नींद न आने के रोग में कई तेल भी काफी फायदेमंद होते हैं. आप तुलसी का तेल, देवदार का तेल, लैवेंडर तेल, रोजमैरी औयल, विंटर ग्रीन औयल आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं. आप को किसी भी तेल की 1-2 बूंदें पानी की बालटी में डालनी है.

घरेलू उपचार

वैज्ञानिकों का कहना है कि लैवेंडर के तेल से मालिश करने से यह तेल लगाने के 5 मिनट के भीतर ही शरीर की कोशिकाओं में पहुंच जाता है. इस तेल का शांत प्रभाव नींद न आने की बीमारी से बचाता है. इस की सुगंध सीधे दिमाग तक पहुंचती है और तेल के वाष्पीकृत भीतरी तत्त्व सीधे सांस में प्रवेश करते हैं.

अगर सोने जाने से पहले गरम पानी से नहाने का समय नहीं है तो कुनकुने पानी में अपने पैर डाल कर बैठ जाएं. दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद यह रिलैक्स करने का बेहतरीन तरीका है. इस उपाय से स्किन हाइड्रेट होती है, मांसपेशियां ढीली पड़ती हैं. इस से रिलैक्स होने में मदद मिलती है, जिस से बिस्तर पर लेटते ही नींद आ जाती है.

पेनकिलर दवाइयां ज्यादा लेना खतरनाक होता हैं !

दर्दनिवारक गोलियां फौरीतौर पर भले ही दर्द से नजात दिला दें लेकिन इन का एडिक्शन व साइडइफैक्ट्स कई अनचाही स्वास्थ्य समस्याएं दे जाते हैं. ऐसे में इन से दूर रहना ही बेहतर है.

आज की भागतीदौड़ती जिंदगी में हमारे पास आराम करने का बिलकुल भी समय नहीं है. ऐसे में भीषण दर्द की वजह से हमें बैठना पड़े तो उस से बड़ी मुसीबत कोई नहीं लगती है. कोई भी दर्द से लड़ने के लिए न तो अपनी एनर्जी लगाना चाहता है और न ही समय. इसलिए पेनकिलर टैबलेट खाना बहुत आसान विकल्प लगता है. बाजार में हर तरह के दर्द जैसे बदनदर्द, सिरदर्द, पेटदर्द आदि के लिए कई तरह के पेनकिलर मौजूद हैं.

अलगअलग तरह के पेनकिलर शरीर के विभिन्न दर्दों के लिए काम करते हैं और वह भी इतने बेहतर ढंग से कि कुछ ही मिनटों में दर्द गायब हो जाता है और व्यक्ति फिर से काम करने को तैयार हो जाता है.

शरीर में हलका सा दर्द होते ही हम एक पेनकिलर मुंह में डाल लेते हैं. इस से होता यह है कि शरीर की दर्द से लड़ने की क्षमता घट जाती है और हम शरीर को दर्द से स्वयं लड़ने देने के बजाय उसे यह काम करने के लिए पेनकिलर्स का मुहताज बना देते हैं. काम को सरल बनाने के लिए तरीकों का इस्तेमाल करना मानव प्रवृत्ति है और ईजी पेनकिलर एडिक्शन उसी प्रवृत्ति का परिणाम है.

क्या है पेनकिलर एडिक्शन

पेनकिलर ऐसी दवाइयां हैं जिन का इस्तेमाल मैडिकल कंडीशंस जैसे माइग्रेन, आर्थ्राइटिस, पीठदर्द, कमरदर्द, कंधे में दर्द आदि से अस्थायी तौर पर छुटकारा पाने के लिए किया जाता है. पेनकिलर बनाने में मार्फिन जैसे नारकोटिक्स, नौनस्टेरौइडल एंटी इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स और एसेटेमिनोफेन जैसे नौननारकोटिक्स कैमिकल का इस्तेमाल होता है. पेनकिलर एडिक्शन तब होता है जब जिसे ये पेनकिलर दिए गए हों और वह शारीरिकतौर पर उन का आदी हो जाए.

इस एडिक्शन के कितने बुरे प्रभाव हो सकते हैं, यह बात हमारे दिमाग में जब चाहे मुंह में पेनकिलर टैबलेट्स डालते हुए आती ही नहीं है. अन्य एडिक्शन की तरह इस के भी साइड इफैक्ट्स समान ही होते हैं. कई बार दर्द न होने पर भी इस के एडिक्ट पेनकिलर खाने लगते हैं. इन्हें खाने वालों को तो लंबे समय तक पता ही नहीं चलता है कि वे इस के शिकार हो गए हैं. उन का मनोवैज्ञानिक स्तर अस्तव्यस्त हो जाता है. इस एडिक्शन से बाहर आने के लिए उन्हें चिकित्सीय मदद लेनी पड़ती है.

साइड इफैक्ट्स

पेनकिलर्स में सेडेटिव इफैक्ट्स होते हैं जिस की वजह से हमेशा नींद आने का एहसास बना रहता है. पेनकिलर लेने वालों में कब्ज की शिकायत अकसर देखी गई है. पेट में दर्द, चक्कर आना, डायरिया और उलटी इन्हें लेने वालों में आम देखी जाती है. इस के अतिरिक्त भारीपन महसूस होने के कारण सिरदर्द और पेट में दर्द रहने लगता है. मूड स्ंिवग्स और थकावट इन में आम बात हो जाती है. साथ ही, कार्डियोवैस्कुलर और रैस्पिरेट्री गतिविधियों पर भी असर होता है, हार्टबीट व ब्लडप्रैशर में तेजी से उतारचढ़ाव तक ऐसे मरीजों में देखा गया है. पेनकिलर एडिक्शन लिवर पर भी असर डालता है और इन का अधिक मात्रा में सेवन करने से जोखिम और बढ़ जाता है.

मिचली आना, उलटी होना, नींद आना, मुंह सूखना, आंखों की पुतली का सिकुड़ जाना, रक्तचाप का अचानक कम हो जाना, कौंसटिपेशन होना दर्दनिवारक दवाइयों के सेवन से होने वाले कुछ आम साइड इफैक्ट्स हैं. इस के अलावा खुजली होना, हाइपोथर्मिया, मांसपेशियों में तनाव जैसे साइड इफैक्ट्स भी पेनकिलर के सेवन से होते हैं.

फोर्टिस अस्पताल, वसंत कुंज, नई दिल्ली के कंसल्टैंट फिजिशियन डा. विवेक नांगिया के अनुसार, ‘‘अकसर मरीज हमारे पास यह शिकायत ले कर  आते हैं कि उन की किडनी ठीक ढंग से कार्य नहीं कर रही है. जब हम विस्तृत जानकारी लेते हैं तो पता चलता है कि मरीज एनएसएआईडी नौन स्टीरौयड एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग्स गु्रप की दवाइयां लंबे समय से ले रहा है.

‘‘न केवल किडनी फेलियर, बल्कि मरीज अल्सर या पेट में ब्लीडिंग की शिकायत ले कर भी हमारे पास आते हैं, जो अत्यधिक मात्रा में पेनकिलर लेने की वजह से होती है. पेनकिलर लेना ऐसे में एकदम बंद कर देना चाहिए. पैरासिटामोल जैसी सुरक्षित दवाइयां बिना डाक्टर की सलाह के ली जा सकती हैं, पर बहुत कम समय के लिए.’’

अकसर महिलाएं पीरियड्स के दिनों में भी दर्द से बचने के लिए पेनकिलर लेती हैं. हालांकि इस से राहत महसूस होती है पर इस का अधिक मात्रा में सेवन करने से एसिडिटी, गैसट्राइटिस, पेट में अल्सर आदि की समस्याएं हो सकती हैं. इस के अलावा, अगर पेनकिलर खाने से दर्द से राहत मिलती है तो भी चिकित्सकों की राय लें. अगर पेनकिलर्स का उपयोग गलत ढंग से किया जाए तो उस से दर्द और बढ़ सकता है. इसलिए दर्द कम करने के लिए अगर पेनकिलर ले रहे हों तो यह भी याद रखें कि इस से दर्द बढ़ भी सकता है.

बच्चों से ज्यादा लाड़प्यार इस तरह बिगाड़ देता हैं !

बच्चों से लाड़प्यार करने में बुराई नहीं है. लेकिन अच्छाबुरा सोचे बगैर उन की हर जिद मान लेना कई बार बड़े हादसे व दुख की वजह बन जाती है.

कई बार पेरैंट्स अपने बच्चों की नाजायज बात भी मान लेते हैं. पेरैंट्स को लगता है कि बच्चों की खुशी के लिए उन की बात को मान लेना चाहिए. कई मामलों में देखा गया है कि बच्चों की नाजायज मांग मान लेना दुख का कारण भी बन जाता है. बच्चे अपनी जिद में अनजाने में अपनी ही जान के दुश्मन बन जाते हैं जिस से पूरा परिवार अवसाद में डूब जाता है.

प्रणव का 16वां बर्थडे था. घर में हंसीखुशी का माहौल था. प्रणव अपने मातापिता का इकलौता बेटा था. इसलिए घर में लाड़प्यार खूब मिलता था. प्रणव के पिता का काफी बड़ा कारोबार था. बच्चे की खुशी के लिए वे हरदम तैयार रहते थे.

प्रणव की मां गृहिणी थी. अपने बेटे को देख कर वह हमेशा खुश होती थी. वह गर्व से कहती भी थी, ‘मेरा बेटा बहुत स्मार्ट और होनहार है. अपनी उम्र के दूसरे लड़कों के मुकाबले ऐसे काम करता है जो उस से 5 साल बड़ी उम्र के लड़के करते हैं’.

प्रणव के पापा ने उस से पूछा, ‘‘बर्थडे पर तुम को क्या गिफ्ट चाहिए?’’ प्रणव ने हाईस्पीड बाइक की मांग रख दी. प्रणव के पिता ने उसे एक लाख रुपए की कीमत वाली बाइक गिफ्ट दे दी. प्रणव के 2 दोस्तों के पास भी वैसी बाइक थीं. वह उन से बाइक चलाना सीख चुका था.

प्रणव के पास ड्राइविंग लाइसैंस नहीं था. उस ने ड्राइविंग लाइसैंस बनवाने का पता किया. परिवहन औफिस से पता चला कि 18 साल से नीचे के बच्चों का ड्राइविंग लाइसैंस नहीं बनता है. इस पर उस के कारोबारी पिता ने नंबर दो का रास्ता निकाला और रिश्वत के बल पर ड्राइविंग लाइसैंस बनवा दिया.

प्रणव का एक साथी अरनव ही ऐसा था जिस के पास बाइक नहीं थी. अरनव का बर्थडे आने वाला था. उस ने भी अपने पापामम्मी से बाइक दिलाने की बात कही. अरनव के पेरैंट्स ने उसे समझाया कि अभी तुम्हारी उम्र बाइक चलाने वाली नहीं है. जब बड़े हो जाओगे तो बाइक दिला देंगे. यह बात अरनव को अच्छी नहीं लगी.

दूसरे दोस्तों को देख कर अरनव को लगता कि वे लोग बहुत स्मार्ट हैं, केवल वह ही सब से पीछे रह गया है. अरनव अपनी मां को बैस्ट फ्रैंड मानता था. उस ने मां से कहा, ‘‘आप लोग मुझे बाइक क्यों नहीं दिला देते? स्कूल में सभी मेरा मजाक उड़ाते हैं.’’ उस की मां ने समझाया, ‘‘हम लोग तुझे बहुत प्यार करते हैं. हम नहीं चाहते कि बाइक चलाते समय तेरा कोई ऐक्सिडैंट हो जाए और तुम को चोट लग जाए. जब तुम बड़े हो जाओगे तो मैं खुद तुम को बाइक ले कर दूंगी.’’

अरनव को मां की कुछ बात समझ में आई और कुछ उस ने समझने की जरूरत नहीं समझी. दिन निकलने लगे. अरनव ने अब प्रणव से दोस्ती कम कर दी. वे लोग उसे नीचा दिखाते थे. स्कूल में गरमी की छुट्टियां हो चुकी थीं. बच्चे नई क्लास में चले गए थे. गरमी की छुट्टियों के बाद सभी दोस्त मिलने वाले थे. अरनव को प्रणव नहीं दिखा, वह पता करने लगा. प्रणव के दोस्त ने बताया कि उस का बाइक चलाते हुए ऐक्सिडैंट हो गया जिस से उस का एक पैर टूट गया. उस में रौड पड़ी है. अब वह कभी बाइक नहीं चला पाएगा.

स्कूल की छुट्टी के बाद अरनव प्रणव के घर गया. प्रणव घर के लौन में कुरसी पर बैठा था. उस के चलने के लिए वाकर वहीं रखा था. उसे पकड़ कर वह इधरउधर जाता था. प्रणव ने बताया कि डाक्टर ने अभी उसे 3 माह बिस्तर पर रहने की हिदायत दी है. प्रणव को देख कर अरनव के सामने मां की बात याद आने लगी. प्रणव की मां को इस बात का अफसोस था कि बेटे को बाइक क्यों दिलाई? घर आ कर अरनव ने अपनी मां को सौरी बोला. इस के बाद प्रणव और उस की मां की पूरी बात बताई.

प्रणव के साथ हुए हादसे के बाद स्कूल वालों ने बच्चों को बाइक लाने से मना कर दिया. कुछ पेरैंट्स ने बच्चों से उन की बाइक छीन ली. अगर प्रणव के साथ हादसे से पहले दूसरे बच्चों के पेरैंट्स ने भी अरनव की मां जैसा व्यवहार किया होता तो शायद प्रणव का यह हाल न होता. वह भी दूसरे बच्चों की तरह हंसखेल रहा होता.

रफ्तार में फंसी जिंदगी

प्रणव कोई अकेला ऐसा बच्चा नहीं है जिस के साथ ऐसी दुर्घटना घटी हो. तेज रफ्तार बाइक के चलते रोज ही कहीं न कहीं हादसे होते रहते हैं. तेज रफ्तार का जनून टीनएज बच्चों पर भारी पड़ने लगा है. यह बात केवल लड़कों तक ही सीमित नहीं है बल्कि लड़कियों में भी बिना गियर के हाईस्पीड स्कूटी का प्रयोग बढ़ गया है. इस के चलते उन के साथ भी हादसे होने लगे.

इंटरमीडिएट की छात्रा शिवानी अपने घर से 6 किलोमीटर दूर स्कूटी से स्कूल जाती थी. एक दिन वह एक ट्रक को ओवरटेक कर रही थी. सामने से औटो आ गया जिस से उस का ऐक्सिडैंट हो गया. मौके पर ही शिवानी की मौत हो गई. आंकड़े बताते हैं कि सड़क दुर्घटनाओं में सब से ज्यादा हादसे बाइक सवारों के साथ होते हैं. इन में युवाओं और छात्रों के साथ होने वाले हादसों की संख्या सब से ज्यादा है.

अब शहर बड़े हो गए हैं. सड़कें चौड़ी और हाइवे से जुड़ गई हैं. तेज स्पीड वाहन आ गए हैं. ऐसे में ऐक्सिडैंट का खतरा बढ़ गया है. मई, जून और 15 जुलाई, 2017 तक केवल लखनऊ शहर में 290 सड़क  हादसे हुए. इन में करीब 110 लोगों की जानें गईं. 180 लोग गंभीररूप से घायल हुए.

सड़क दुर्घटनाओं पर काम करने वाली डाक्टर रमा श्रीवास्तव कहती हैं, ‘‘हादसों में मरने वालों की संख्या बढ़ने का सब से बड़ा कारण दुर्घटना से निबटने के सही उपाय का न होना है. हादसों में घायल होने वाले अगर समय से अस्पताल पहुंच जाएं तो उन की जान बच सकती है. एंबुलैंस और अस्पताल का सही इंतजाम न होने से हादसे और भी गंभीर हो जाते हैं. इन से बचने के लिए सब से ज्यादा जरूरी है कि पेरैंट्स जागरूक हों. अगर समय रहते वे न चेते तो जिंदगीभर का दुख झेलना पड़ सकता है.’’

दुर्घटना का सबब

सड़क हादसों की तादाद में बढ़ोतरी का सब से बड़ा कारण सड़कों का खराब होना है. बरसात के मौसम में सड़कों पर पड़ी बजरी निकल आती है, यह तेज रफ्तार बाइक और दूसरी दोपहिया गाडि़यों के बैलेंस को बिगाड़ सकती है. जिस से दुर्घटनाएं बढ़ जाती हैं. बरसात के दिनों में बाइक में ब्रेक सही से नहीं लगते हैं, जिस से सड़क हादसे बढ़ जाते हैं.

परिवहन विभाग में एआरटीओ के पद पर सेवारत रीतू सिंह कहती हैं, ‘‘शहर के अधिकांश छात्र और युवा बिना हैलमेट के बाइक चलाते हैं, जिस से सड़क हादसे होने पर बचाव नहीं हो पाता है. ऐसे बच्चे एक बाइक पर अकेले नहीं चलते हैं. वे अपने 2-3 दोस्तों को भी बाइक पर बैठा लेते हैं, जिस से हादसे होने की आशंका बढ़ जाती है.’’

लखनऊ की अलीगंज कालोनी में सड़क क्रौस करने के लिए ओवरब्रिज का प्रयोग न कर के गलत दिशा से सड़क क्रौस करने वाले एक ही बाइक पर सवार 3 छात्रों की मौत हो गई. इन लोगों ने भी सिर पर हैलमेट नहीं पहना था. हादसे के बाद इन के सिर खंभे से टकरा गए. 2 की घटनास्थल पर ही मौत हो गई और एक की मौत अस्पताल पहुंच कर हो गई.

पुलिस विभाग के एक इंस्पैक्टर का कहना है, ‘‘हम लोग वाहन चैकिंग के समय जब गलत तरह से वाहन चलाने वालों का चालान करते हैं तो उन को बचाने के लिए सिफारिशी फोन आते हैं. अगर बच्चों को पुलिस चालान का सामना करना पड़े तो शायद वे दोबारा ऐसी गलती न करें.’’

पर्सनल लोन लेते समय ध्यान रखने की बातें !

पर्सनल लोन वित्‍तीय संकट के समय आपातकालीन परिस्थितियों में काम आता है. शादी के समय होने वाले अनगिनत खर्चें, अस्‍पताल के खर्चें, किसी को ब्‍याज देनी हो या फिर कोई छोटा सा बिजनेस शुरु करना हो पर्सनल लोन आपके लिए हमेशा ही काम आता है. चूंकि पर्सनल या व्‍यक्तिगत लोन पर आपको बहुत अधिक ब्‍याज देना होता है इसलिए एक्‍सपर्ट हमेशा आपको पर्सनल लोन सिर्फ तत्‍काल आवश्‍यकता में ही लेने के लिए सुझाव देंगे. यहां पर आपको कुछ जरुरी चीजें बताएंगे जिसे आपको पर्सनल लोन लेने से पहले चेक कर लेना चाहिए.

योग्‍यता

ऋण की राशि का लाभ उठाने के लिए, आपको अपनी योग्यता की जांच करनी होगी जिसे आप किसी बैंक या किसी वित्तीय संस्थान वेबसाइट के माध्यम से जान सकते हैं और उनके द्वारा प्रदान किए गए व्यक्तिगत ऋण पात्रता कैलक्यूलेटर से जांच सकते हैं. आपकी व्यक्तिगत ऋण योग्यता आपकी आय, पुनर्भुगतान क्षमता, क्रेडिट स्कोर इत्यादि पर निर्भर करेगी. ऋणदाता आम तौर पर व्यक्तिगत ऋण मंजूर करने से इन्‍हीं चीजों की जांच करता है.

पुनर्भुगतान क्षमता

ऋण लेने से पहले, हमेशा यह जांचना उचित होता है कि आप समय पर ईएमआई चुकाने में सक्षम होंगे या नहीं. हालांकि, ऋण देने के समय बैंक या ऋणदाता द्वारा पुनर्भुगतान क्षमता प्रोफाइलिंग की जाती है ताकि उधारकर्ता के नकदी या आय स्रोतों की तुलना करने के लिए उधारकर्ता के पास आवश्यकता के अनुसार ऋण चुकाने के लिए पर्याप्त स्रोत हों.

प्री-पेमेंट पेनाल्‍टी

आपको इस तथ्य से अवगत होना चाहिए कि उधारकर्ता आम तौर पर शुल्क लेते हैं यदि आप अपने ऋण का भुगतान जल्दी ही करते हैं डील के अनुसार, प्रारंभिक पुनर्भुगतान बैंक या वित्तीय संस्थानों को ब्याज कमाने से रोकता है क्योंकि उन्हें लेने की उम्मीद थी. इसलिए, सबसे कम फौजदारी शुल्क के साथ ऋण लेने की सलाह दी जाती है. वर्तमान में, गृह ऋण पर कोई फौजदारी शुल्क या प्रीपेमेंट जुर्माना लागू नहीं किया जाता है.

ब्‍याज दर

ब्याज दर आपके क्रेडिट स्कोर के आधार पर 8 से 16 प्रतिशत के बीच हो सकती है. साथ ही, किसी को ऋण लेने से पहले अन्य संस्थान के साथ ब्याज दरों की जांच और तुलना करनी चाहिए क्योंकि कई प्रतिस्पर्धी कारणों से ब्याज फिर से भिन्न हो सकता है और ऐसे मामले में, आपको सस्ती कीमत पर ऋण प्राप्त करने का लाभ मिल सकता है. आप विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा दी गई व्यक्तिगत ऋण ब्याज दरों को देख सकते हैं.

EMI पेमेंट

समान मासिक आय या ईएमआई की गणना ब्याज दर, समय अवधि और ऋण के वर्तमान मूल्य के आधार पर की जाती है. हालांकि, ईएमआई रेंज संकेतक हैं. वास्तविक स्थिति में, इसमें बैंक के नियमों और शर्तों के अनुसार अन्य शुल्क शामिल हो सकते हैं. ब्याज दरें एक असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण के लिए वेतनभोगी व्यक्ति और पेंशनभोगियों के अनुसार आधारित होती हैं. वास्तविक लागू ब्याज दर क्रेडिट प्रोफ़ाइल, ऋण राशि, कार्यकाल, कंपनी जिसके लिए आप काम करते हैं और बैंक के विवेकाधिकार के आधार पर भिन्न हो सकती है.